आजादी के जन नायक सुभाष चन्द्र बोस का देश हमेशा रहेगा ऋणी : सांसद दद्दन मिश्रा

प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट :

श्रावस्ती : देश को आजाद कराने मे सुभाष चंद्र बोस की बहुत ही अहम भूमिका रही है। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। जिनकी निडर देशभक्ति ने उन्हें देश का हीरो बनाया। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिये, उन्होंने आजाद हिन्द फौज का गठन किया था। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारतीय राष्ट्रीय संग्राम में सबसे अधिक प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। उक्त विचार विकासखण्ड सिरसिया के अन्र्तगत घोघवा कला स्थित बनवारी देवी अशोक कुमार स्मारक महाविद्यालय में नेता सुभाष चन्द्र बोस जंयती के अवसर पर नेता जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन करने के उपरान्त सांसद दद्दन मिश्रा ने व्यक्त किया। इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बलरामपुर सदर के विधायक पल्टू राम भी उपस्थित रहे।

उन्होने अपने सम्बोधन में कहा कि ये वो जन नायक हैं जिन्होने कहा था, ”तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा।” इस जज्बाद के लिए देश हमेशा उन्हे नमन करता रहेगा। नेता जी के पिता जानकीनाथ एक प्रसिद्ध वकील थे और ऊनकी माता प्रभा देवी धार्मिक थीं। सुभाष चन्द्र बोस बचपन से ही मेधावी छात्र थे। छात्र जीवन से लेकर देश को आजादी दिलाने तक उन्होने देश के हित में जो ऐतिहासिक कार्य किया है उसके लिए पूरा देश हमेशा नमन करता रहेगा।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने अपने सम्बोधन में कहा कि आजादी की बात हो और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जिक्र ना हो, ऐसा भला हो सकता है क्या ? सुभाष चंद्र बोस केवल एक इंसान का नाम नहीं है बल्कि ये नाम है उस वीर का, जिनकी रगों में केवल देशभक्ति का खून बहता था। बोस भारत मां के उन वीर सपूतों में से एक हैं, जिनका कर्ज आजाद भारतवासी कभी नहीं चुका सकते हैं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय संग्राम में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया । उन्होंने महात्मा गाँधी के नेतृत्व में देशबंधु चितरंजनदास के सहायक के रूप में कई बार स्वयं को गिरफ्तार कराया । कुछ दिनों के बाद उनका स्वास्थ्य भी गिर गया । परन्तु उनकी दृढ इच्छा शक्ति में कोई अन्तर नहीं आया । उनके अन्दर राष्ट्रीय भावना इतनी जटिल थी।

उन्होने कहा कि सुभाष चन्द्र बोस की जीवनी से आज कल के नौजवानों को सीख लेनी चाहिए जिससे प्रदेश के साथ-साथ देश का भी नाम रोशन कर सके।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार शुक्ल ने अपने सम्बोधन में कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध में उन्होंने भारत छोड़ने का फैसला किया। वह जर्मन चले गए और वहाँ से फिर 1943 में सिंगापुर गए जहाँ उन्होंने इण्डियन नेशनल आर्मी की कमान संभाली। जापान और जर्मनी की सहायता से उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने के लिए एक सेना का गठन किया जिसका नाम उन्होंने ” आजाद हिन्द फौज ”रखा। कुछ ही दिनों में उनकी सेना ने भारत के अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह नागालैण्ड और मणिपुर में आजादी का झण्डा लहराया। उनकी बहादुरी और हिम्मत यादगार बन गयी । आज भी हम ऐसा विश्वास करते हैं कि भारत को आजादी आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों की बलिदानों के बाद मिली है।

इस अवसर पर तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, श्रावस्ती विधायक राम फेरन पाण्डेय, जिलाध्यक्ष शंकर दयाल पाण्डेय, शिक्षक पंकज देव मिश्रा, जिला मीडिया प्रभारी महेश मिश्रा ओम, ने भी अपने विचार व्यक्त किये।इस अवसर पर जवाहर नवोदय विद्यालय बलरामपुर के प्रधानाचार्य जी0के0 मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष जगदम्बिका प्रसाद वर्मा, रणवीर सिंह समेत भारी संख्या में छात्र/छात्राएं एवं जनसमूह उपस्थित रहा।

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