नोडल शिक्षक देंगे बच्चों की बीमारी की जानकारी

प्रवीण मिश्रा की रिपोर्ट :

श्रावस्ती : बच्चों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए अब प्राथमिक विद्यालयों में स्वास्थ्य नोडल शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। नोडल शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि किसी छात्र या छात्रा के दो दिन या उससे ज्यादा छुट्टी पर रहने की स्थिति में उसके अभिभावकों से संपर्क करके छुट्टी की वजह जाने। यदि छात्र किसी संक्रामक रोग की चपेट में आ गया है तो इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजे।

साथ ही बच्चों को अपने आस पास साफ-सफाई रखने की भी जानकारी देंगे। सीएमओ डॉ. वीके सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए अंतर्विभागीय प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, ग्राम विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, पशु पालन विभाग, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, शिक्षा विभाग, कृषि एवं सिचाई विभाग, दिव्यांग जन सशक्तिकरण विभाग, मतस्य पालन, स्वच्छता मिशन, जल निगम, सिंचाई विभाग, सूचना एवं जन संपर्क विभाग को शामिल किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग को नोडल बना कर सभी विभागों को उनके दायित्व सौंप दिए गए हैं। इस अभियान के तहत वेक्टर नियंत्रण, साफ-सफाई, कचरा निस्तारण,जलभराव रोक, शुद्ध पेयजल आपूर्ति पर विशेष बल दिया गया है, जिससे आमजन इन बीमारियों के प्रति जागरूक हो सकें। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य नोडल शिक्षक की नियुक्ति के संबंध में बीएसए को पत्र भी लिखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए लोग अपने घरों के आसपास स्वच्छता का ध्यान रखें। झाडियों को हटाते रहें । नंगे पांव न चलें। चूहों और मच्छरों से बचें। मच्छर से बचने के लिए पूरी बांह वाली कमीज या पैंट पहनें। अपने आसपास जलजमाव न होने दें। खुले में शौच न करें। साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।

संचारी रोग और बचाव

संचारी या संक्रामक रोग, किसी ना किसी रोगजनित कारकों (रोगाणुओं) जैसे कवक, जीवाणु, वाइरस इत्यादि के कारण होते हैं। संक्रामक रोगों में एक शरीर से अन्य शरीर में फैलने की क्षमता होती है। मलेरिया, टायफायड, चेचक, इन्फ्लुएन्जा इत्यादि संक्रामक रोगों के उदाहरण हैं। संक्रमण रोग के कारणों में बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और सूक्ष्म परजीवी (जैसे मलेरिया या फाइलेरिया रोग के परजीवी) शामिल होते हैं। संक्रमण बीमारियों का इलाज, अन्य समूहों की बीमारियों के इलाज से आसान होता है। इन रोगों से बचाव के लिए टीके भी उपलब्ध हैं। रहन-सहन सुधार से भी इनसे बचाव किया जा सकता है।

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