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महाराष्ट्र:भिवंडी में श्रद्धा एंव विश्वास के साथ मनाया गया अन्नकूट महोत्सव एंव बलिप्रतिपदा महोत्सव

 

 

सूरजपाल यादव की रिपोर्ट

भिवंडी महाराष्ट्र भिवंडी शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में अन्नकूट एवं बलिप्रतिपदा का उत्सव श्रद्धा एवं विश्वास के साथ पारंपरिक तरीके से मनाया गया । ताड़ाली के ठाकरापाड़ा रोड स्थित स्वामी गंभीरानंद आश्रम में स्वामी चिदानंद मिशन के तहत अन्नकूट महोत्सव एवं गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया| जिसमें सुबह सुंदर कांड पाठ,मंगलमय भजन एवं कीर्तन के साथ संत प्रवचन ,गोवर्धन पूजा,गोमाता की पूजा और आरती के साथ छप्पन भोग महाप्रसाद का आयोजन किया गया था । आश्रम द्वारा एक भोग लाना है और छप्पन भोग पाना का आह्वान किया गया था । जिसके तहत भक्तों द्वारा 167 प्रकार का व्यंजन लाया गया था| जिसका भोग लगाया गया । आश्रम के ब्रह्मचारी प्रेमस्वरूप चैतन्य द्वारा गोवर्धन की पूजा कराने के बाद मुख्य यजमान देवी प्रकाश त्रिपाठी एवं उनकी पत्नी द्वारा भगवान कृष्ण को 167 प्रकार का भोग लगाया गया और गौमाता की पूजा की गई| इस अवसर पर ब्रह्मचारी प्रेमस्वरूप चैतन्य ने धनतेरस से लेकर बलिप्रतिपदा तक लगातार पांच दिन मनाए जाने वाले दीपावली त्योहार के बारे में जानकारी देते हुए बताया व धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला । डॉ.प्रभाकर विश्वकर्मा,शशिनाथ मिश्र,बलराम महापात्र,प्रेमचंद्र जायसवाल,विनोद मिश्रा,धर्मराज तिवारी,दीपमाला विश्वकर्मा,मनीषा झा,शंभुनाथ जेना आदि द्वारा मंगलमय भजन एवं कीर्तन प्रस्तुत किया गया| जिसमें ब्रह्मचारी प्रमोद,ब्रह्मचारिणी श्रद्धा,भारती,चितरुपा एवं सतरूपा जी सहित भारी संख्या में महिला व पुरुष शामिल थे.गोर्वधन पूजा को संपन्न कराने में प्रो.कुलदीपसिंह राठौर,डॉ. अल्पेश चौधरी,प्रमोद सिंह श्रीनिवास कोंगार, त्रिलोकी चौरिसिया,वैभव माने,राम अजय सिंह,लालजी सिंह  एवं दिनेश सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा । इसी तरह ग्रामीण इलाके में बलिप्रतिपदा का त्यौहार पारंपरिक तरीके से मनाया गया । इस अवसर पर खोनी ग्राम पंचायत में पांच से छः फिट लंबी टहनी जमीन में गाड़ दी जाती है । जमीन में गाड़ी गई टहनी को लाख प्रयास करने के बाद भी कोई उखाड़ नहीं पाता है । बलीराजा शक्ति के प्रतीक को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा रहती है । खोनी गांव के बलीराम पाटील द्वारा पिछले 52 वर्षों से परंपरा मनायी जा रही है इसके लिए युवक मित्र मंडल द्वारा 25 हजार रुपए का पुरस्कार भी रखा गया था ।

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