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स्वतंत्र विद्यालय विकास संघ की बैठक 16को

राजू शर्मा की रिपोर्ट मझौलिया प०चम्पारण स्थानिय विधालय सर्वोदय पुब्लिक स्कूल   में 16 दिसंबर को पूर्वाह्न 1 बजे  बैठक रखी गई है । जिसमे सभी निजी विधालयो का उपस्थित  होना अनिवार्य है  । जिसमे वार्षिक अवकाश तालिका ,  संस्कृतिक कार्यक्रम एवं खेल प्रतियोगिता की आयोजन, विद्यालय में पढ़ रहे बच्चे को   पॉलीथिन के उपयोग पर  बैन लगाने हेतु …

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तंगहाल में बीता बचपन कड़ी मेहनत और लगनशीलता से बनाई पहचान

लखनऊ : विपरीत परिस्थितियों से जूझ कर यदि कोई लड़की सभी बाधाओं को पछाड़ते हुए आगे बढ़े एक मुकाम हासिल कर एक सशक्त नारी के रूप में उभरकर सामने आए तो यकीनन हैरानी होना लाजमी है। ऐसी ही चौंकाने वाली और प्रेरणादायक कहानी है डॉ रेखा रोहितश्रव गौर की जो कि कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में बतौर वैज्ञानिक रही हैं। इतना ही …

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‘जब माहौल अचानक राममय हो जाए तो समझ लीजिए चुनाव का मौसम आ गया है’

स्वराज अभियान के नेता योगेन्द्र यादव का आलेख : नई दिल्ली : इस दीपोत्सव पर भाजपा को राम लला की याद कुछ ज्यादा ही सता रही है। दिवाली तो पिछले चार साल भी आई थी, लेकिन अयोध्या जाकर घोषणा का विचार इस बार ही आया है। न जाने कहां से संत समाज से लेकर किन्नर अखाड़ा तक बाहर निकल आए …

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समूचे समाज की सुरक्षा जिनके कंधों पर, क्या उनकी भी परवाह है किसी को ?

श्रीनिवास सिंह मोनू की रिपोर्ट : लखनऊ : आज हमारे समाज में तरह-तरह की कुरीतियां व्याप्त हैं। तरह-तरह की अफवाहें फैला करती हैं, अनेको अनेक घटनाएं दुर्घटनाएं दिन और रात चला करती हैं। जाड़ा गर्मी बरसात सभी मौसमों में बराबर अपनी सेवाएं देते रहते हैं। क्षेत्र चाहे जैसा भी हो मैदानी, जंगली हो या फिर पहाड़ी कभी अपने कर्तव्यों से …

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पढ़ें भारतीय संस्कृति में दिवाली पर्व की महत्ता को रेखांकित करता हमारा ये आलेख

लखनऊ (द्वारकेश बर्मन) : असतो मां सद्गमय,तमसो मां ज्योतिर्गमय,मरतयोमार अंर्तगम्य। अस्त से सात की ओर चल,मृत्यु से अमरत्व की ओर चल। भारतीय वांगमय के सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ और वेदों का यह उद्घोष यदिसर्वाधिक चरितार्थ हुआ दिखाई देता है तो वह सिर्फ पावन पुनीत प्रकाश के पर्व दीपावली पर दिखता है। दीपावली पर दीपों की जगमगाती माला सदियों से यही संदेश सुनाती …

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ज्‍यादा जीने का मतलब बुढ़ापे को ज्‍यादा झेलना है ?

दीप्ति गरजोला के ब्लॉग से साभार : अच्‍छा नहीं लगा ना यह जानकर कि ज्‍यादा जीने का मतलब बुढ़ापे को ज्‍यादा झेलना है। मगर यह सच है। हम में से शायद ही कोई ऐसा होगा जो कम जीना चाहता होगा। हम सभी लंबी उमर की कामना तो करते हैं पर बुढापे की कल्‍पना कोई नहीं करना चाहता। हाल ही में …

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वाह भगवान, जब सब तुझे ही करना तो फिर हम माथा-पच्ची क्यों करें?

आलेख : ओ.पी.मिश्र लखनऊ : किसी भी देश में ईश्वर के अस्तित्व को माना जाये या न माना जाये लेकिन इतना तय है कि हमारे देश भारत में ईश्वर का अस्तित्व यकीनन है क्योंकि यहाँ न तो कोई ढंग से काम करना चाहता और न ही उसे अपनी किसी जिम्मेदारी का अहसास है। मैं समझ नहीं पाता हूँ कि जिस …

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सदन में गतिरोध का जिम्मेदार कौन ? करोड़ों के नुकसान को लेकर सरकार और विपक्ष में घमासान

नई दिल्ली : भारतीय संविधान की धज्जियाँ उड़ाते हुए सरकार और विपक्ष के सांसद ने संसद में जो कार्रवाई की है और संसद नहीं चले दिया है, इसकी साड़ी जवाबदेही दोनों पक्षों के सांसदों पर जाती है। TDP और कांग्रेस के सांसदो ने जो उथल पुथल मचाई है और स्पीकर के सामने उनके दफ्तर में उसका धरना प्रदर्शन किया, जिसके …

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देश में आरक्षण की समस्या और उनसे निपटने की नाकाम कोशिशें ! पढ़ें ये आलेख

आलेख : द्वारकेश बर्मन आरक्षण एक ऐसा शब्द है, जिसका नाम हर दूसरे व्यक्ति के मुह पर है, अर्थात् आरक्षण भारत में, बहुत चर्चा मे है। वैसे तो हम, इक्कीसवी सदी में जी रहे है और अब तक आरक्षण की ही लड़ाई लड़ रहे है। युवाओं और देश के नेताओं के लिये आज की तारीख मे सबसे अहम सवाल यह …

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हनुमान जयंती विशेष : हनुमान जी की ऐसी तस्वीरें शेयर कर आखिर हम साबित क्या करना चाहते हैं ?

आशीष झा के फेसबुक वॉल से साभार आज हनुमान जयन्ती है। फेसबुक पर लगभग सबको देख रहा हूँ कि गुस्से से आग-बबूले हुए हनुमान जी की यही फोटो लगाकर शुभकामनाएं बाँट रहे है। तस्वीर में लग रहा है कि वे किसी से प्रतिशोध लेना चाहते है। अभिव्यक्ति के साथ-साथ हमारे देश में फोटो लगाने की भी स्वतंत्रता है..इसलिए कोई बात …

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